काली कुमाऊं • होली
होली
होली, पहाड़ और लोकजीवन से जुड़ी रचनाओं का संग्रह।
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गाँव चलें, खेलें होली
सखी गाँव चलें, खेलें होलीहे री, गाँव चलें, खेलें होली सज के सँवर के मंदिर पहुँचीमाँ नंदा सुनंदा की डोली बालक बालक गिरधर मोहनहर एक माता है भोली बंसी धुन पर नाच रही हैग्वालन बालन की टोली सीधे साधे लोग यहाँ केमिसरी सी मीठी बोली अबीर गुलाल का रंग बरसताहाँ गोरी की भीग रही चोली…
