॥श्रीजानकीवल्लभो विजयते॥
मैं रमा ना राम में, तोराम मुझमें रम गएरूप जब उनका दिखा, तोनयन जैसे थम...
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मैं रमा ना राम में, तोराम मुझमें रम गएरूप जब उनका दिखा, तोनयन जैसे थम...
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पूरी रचना पढ़ेंहर मन का एक अलग मौसम होता है। अपनी पसंद की विधा चुनिए और कुमाऊँ के शब्दों के साथ थोड़ा समय बिताइए।
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