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काली कुमाऊं • कहानी

कहानियाँ

पहाड़, रिश्तों और जीवन की सच्चाइयों से जुड़ी कहानियों का संग्रह।

  • झपरू का की दावत

    लेखक: रमेश चम्पत

    झपरू का की दावत

    झपरू का सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके थे। उनका परिवार पूर्वजों के समय से ही संपन्न था। झपरू काका का घर परिवार में बड़ा सम्मान था, इलाके में भी दबदबा कायम किया था। घरेलू कार्यों से निजात होने पर आसपास पड़ोसी गाँवों की पंचायतों में भागीदारी निभाने का शौक था। अवसर मिलते ही छोटी-मोटी…

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  • ख़्वाब और ज़रूरतें

    लेखक: दिनेश जोशी 'नीरव'

    ख़्वाब और ज़रूरतें

    पढ़िए दिनेश जोशी ‘नीरव’ की भावुक कहानी ‘ख़्वाब और ज़रूरतें’, जहाँ मजबूरी और संस्कारों के बीच एक युवा के अंतर्द्वंद्व को दर्शाया गया है।

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  • छोटी बहू

    लेखक: दिनेश जोशी 'नीरव'

    छोटी बहू

    गाड़ी आँगन में आकर रुकी। गंगादत्त अपने दोनों बेटों का सहारा लेकर उतरे। महीने भर की बीमारी ने चेहरे का रंग बदल दिया था। गहुएँ भरे-भरे गालों की जगह पीले गड्ढे नज़र आते थे। कपड़े ऐसे झूल रहे थे जैसे शरीर सिर्फ हड्डियों का बना हो। “प्रणाम”, साड़ी का पल्लू सर पर रखते हुए बड़ी…

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  • घनश्याम और भैंसी का दूध

    लेखक: रमेश चम्पत

    घनश्याम और भैंसी का दूध

    घनश्याम सरल और सीधे स्वभाव के व्यक्ति थे, चार बहनों के बाद घनश्याम पैदा हुए थे इसलिए ईजा और बाज्यू के बहुत लाडले थे। उनके होने से पहले घर में जर्सी गाय थी और सब लोग उसी का दूध पीते थे। घनश्याम के होने के बाद माता-पिता को लगा कि इनके पालन-पोषण में कोई कमी…

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  • सटपट्य हरिका

    लेखक: रमेश चम्पत

    सटपट्य हरिका

    ब्रह्म दत्त तिवारी का लड़का महेश सजाना हो गया, उसके साथियों में कुछ ही लोग अबेवा (जिसकी शादी नहीं हुई हो) रह गए। इस कारण ब्रह्म दत्त तिवारी थोड़ा सा परेशान रहते थे। गांव में भी चर्चाएं होने लगी कि बरमका अपने लड़के की शादी नहीं कर पा रहे हैं।बरमका अपनी हैसियत और सामर्थ्य के…

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  • झगड़ालू बहू

    लेखक: रमेश चम्पत

    झगड़ालू बहू

    हरिनंदन जी घर पर गुमसुम रहते थे ,उनकी बहू का क्रोधपूर्ण व्यवहार ही उसका कारण था। आसपास के लोग भी जानते थे कि बहू का व्यवहार अपने सास ससुर के प्रति ठीक नहीं है। बहू को गांव के लोग पीठ पीछे झगड़ालू नाम से पुकारते थे। आज तक हरिनंदन जी का समय ऑफिस जाने और…

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  • जाला

    लेखक: रमेश चम्पत

    जाला

    सुरेश और दिनेश लगभग साल भर बाद आंगन के चारों तरफ बनी चौड़ी दीवार पर बैठे हुए थे।आंगन के चारों ओर चारदीवारी बैठने के लिए ही की गई थी। कल ही अम्मा का वार्षिक श्राद्ध हुआ था। मां के आग्रह पर ही दीवार की चौड़ाई दो फीट और ऊंचाई तीन फीट बनाई थी, ताकि लोग…

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