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“अकेले एक आवाज़ गूँज होती है, पर जब कई मन मिल जाएं तो वह लोक-संगीत बन जाती है। मिलिए उन रचनाकारों और संरक्षकों से जो ‘काली कुमाऊं’ के इस कारवां को आगे बढ़ा रहे हैं।”

अखिलेश चंद्र जोशी
रमेश चंद्र ‘चम्पत’
ललित मोहन गहतोड़ी