सोशलमीडिया के दौर में आजकल लोगों की लड़ाई भी हो गई सोशलमीडि(आई) !
लाइक, कमेंट की मामूली बात पर टूट रही सालों साल की दोस्ती, झगड़े का बन रहा मुख्य कारण।
समाज में कभी जर, जोरू, जमीन या आपसी कहा-सुनी को लेकर लोगों के बीच लड़ाइयां झगड़े होते थे, लेकिन वर्तमान सोशलमीडिया के दौर में लड़ाई का यह ट्रेंड भी बदल गया है। अब लोगों की लड़ाई-झगड़े का नया कारण सोशलमीडिया बन गया है। भाई तूने मेरी पोस्ट पर लाइक-कमेंट क्यों नहीं किया? मेरा व्हाट्सएप स्टेटस क्यों फॉलो नहीं करता? तूने मुझे इंस्टा पर अनफॉलो क्यों किया…. आदि जैसी बातों को लेकर दोस्तों और यहां तक कि रिश्तेदारों में भी छोटे-छोटे विवाद होने लगे हैं। बीते कुछ सालों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां सोशलमीडिया की छोटी सी भड़ास बड़ी लड़ाई में बदलते रह गई। पुलिस और साइबर सेल के पास भी ऐसी कुछ शिकायतें पहुंच रही हैं। जिनका निदान दोनों पक्षों को सामने समझा बुझाकर शांत किया जा रहा है।
टनकपुर के एक युवक किशोर ने बताया कि उसका बचपन का दोस्त रवि उससे सिर्फ इसलिए नाराज हो गया क्योंकि उसके नई मोटर बाइक वाली फोटो पर उसने कमेंट नहीं किया। धीरे-धीरे दूरी इतनी बढ़ी कि दोनों ने एक-दूसरे को सोशलमीडिया पर तो ब्लॉक कर ही दिया और अब आमने-सामने आने पर भी बात तक नहीं करते हैं। ऐसा ही एक मामला स्थानीय दो स्कूली छात्राओं के बीच का है जहां एक व्हाट्सएप स्टेटस को लेकर लंबी कहासुनी हो गई जो अब बोलचाल बंद होने पर छूटी है। एक प्रशिक्षित संगठन के ह्वाइट शप ग्रुप में तो संगठन से संबंधित अन्य मैसेज यथा शुभ प्रभात, शुभ रात्रि सहित अन्य किसी भी प्रकार का यदि आप मैसेज भेजोगे तो ग्रुप एडमिन उसे डिलीट करने में कतई समय नहीं लगा रहा है।
इसको लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि सोशलमीडिया ने लोगों में खुद को और बेहतर दिखाने और दूसरों से मान्यता पाने की होड़ बढ़ा दी है। हर कोई चाहता है कि उसकी ही पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लाइक, शेयर और कमेंट मिले। जब कोई करीबी ही लाइक या कमेंट नहीं करता है तो उसे सोशल दुश्मन के तौर पर देखा जाने लगा है। मनोवैज्ञानिक इसे डिजिटल दौर की नई मानसिक बीमारी मान रहे हैं। उनका कहना है आज के दौर में लोग वर्चुअल लाइक को ही असली सम्मान समझने लगे हैं। कम लाइक पाने पर लोगों में तनाव और हीन भावना बढ़ रही है।
सोशलमीडिया ने जहां लोगों की दूरियों को कम करने का काम किया था, लेकिन अब यही दूरी बढ़ाने का कारण भी बन रहा है। इसके लिए लाइक-कमेंट की दुनिया से बाहर निकलकर असल जिंदगी के रिश्तों को महत्व दिया जाना आवश्यक है वरना भविष्य में दोस्ती की परिभाषा सिर्फ एक फॉलो बटन तक ही सीमित होकर न रह जाए। इसका सबसे ज्यादा असर आज युवाओं में देखा जा रहा है। इनका ज्यादातर समय मोबाइल फोन पर रील, स्टोरी और स्टेटस देखने में बीत रहा है। कौन किसका स्टेटस देख रहा और कौन सीन करके रिप्लाई नहीं कर रहा इस टच पर रिश्ते तय हो रहे हैं। कई बार तो ग्रुप से जोड़ने, लेफ्ट होने या ग्रुप में किसी को एडमिन न बनाने पर भी झगड़े हो रहे हैं।
बनबसा का एक युवक तो अपने दोस्त से इसलिए नाराज हो गया क्योंकि उसने उसके जन्मदिन पर इंस्टाग्राम पर स्टोरी नहीं लगाई थी। पुलिस और साइबर क्राइम एक्टिविस्टों की मानें तो आजकल साइबर अपराध के साथ-साथ सोशल मीडिया से जुड़े छोटे-मोटे मनमुटाव के मामले भी सामने आ रहे हैं। कई बार सोशलमीडिया का मामूली विवाद हकीकत की मारपीट तक पहुंच जाता है।
इससे बचाव के लिए युवाओं से अपील करते हैं कि वह सोशलमीडिया को महज मनोरंजन तक सीमित रखें और इसे हकीकत समझते हुए अपने व्यक्तिगत रिश्तों पर कभी हावी न होने दें। आज के युवाओं को वह रील लाइफ और रीयल लाइफ के अंतर को समझने के लिए लगातार प्रेरित कर रहे हैं।
– ललित मोहन गहतोड़ी



