निस्वास

रचयिता: दिनेश जोशी ‘नीरव’

काफल पाको बुरास फूली
म्यारा मन मा निस्वास लागी गे
त्वेके मेरी हर बात भूली
म्यारा मन मा निस्वास लागी गे

रिमझिमा बरखा लागी चौमासा महीना
त्वे दगड़ी जो बितायी याद औनी दीना
मेरी आँखों में सोन भादों
म्यारा मन मा निस्वास लागी गे

धुर जंगला फूल खिलीं पानी का धारा
कावी कावी रात आइ परान सूखी म्यारा
तेरी कोई कुसल नि आयी
म्यारा मन मा निस्वास लागी
कौनी बॉर्डर में लागि लड़ाई
म्यारा मन मा निस्वास लागी गे

एक छिन भी मी ना भुल्यों गौं घर बज़ार
जब ले आंखां बंद करू तेरि भोली अनवारा
तेरि हँस हँस बत्यानु याद छ
म्यारा मन मा निस्वास लागी गे
तेरि माथे की बिंदूरी हाए रे
म्यारा मन मा निस्वास लागी गे

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