॥श्रीजानकीवल्लभो विजयते॥ रचयिता: अखिलेश जोशी 'अखि-लेख' मैं रमा ना राम में, तोराम मुझमें रम गए रूप जब उनका दिखा, तोनयन जैसे थम गए। बुद्धि से वो थे परे, तोमन से फिर वो मान गए। और कुछ की चाह ना, तोजितने थे सब, तम गए॥ Spread the love